अफसरों को अपने ही कर्मचारियों की खबर ही नहीं

 

इंदौर। भोज यूनिवर्सिटी के सेंटर पर संचालित प्री एक्जाम ट्रेनिंग सेंटर बंद होने के एक साल बाद तक आदिम जाति कल्याण विभाग को अपने कर्मचारियों की याद ही नहीं आई। दो कर्मचारी पिछले एक साल से बिना काम के यहां मुफ्त का वेतन ले रहे थे। इस बीच यूनिवर्सिटी ने कर्मचारियों की सेवाएं मूल विभाग को लौटाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।

अनुसूचित जाति-जनजाति के परीक्षार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग ट्रेनिंग देता है। परिणाम अच्छे नहीं मिलने पर यह ट्रेनिंग भोज यूनिवर्सिटी को सौंप दी गई। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के खंडवा रोड स्थित भोज यूनिवर्सिटी के सेंटर पर 2000 से यह ट्रेनिंग हो रही थी। इसके लिए आदिम जाति कल्याण विभाग के दो कर्मचारियों को यहां अटैच किया गया था।

पिछले साल सरकार ने यूनिवर्सिटी से ट्रेनिंग बंद कर दी, लेकिन विभाग के कर्मचारियों को मूल विभाग में नहीं भेजा। अपने ही कर्मचारियों को भूल बैठे विभाग को लोकसभा चुनाव के कारण इनकी याद आई और ताबडतोड भोज यूनिवर्सिटी के सेंटर प्रभारी को पत्र लिखकर कर्मचारी लौटाने को कहा गया। इस दौरान दोनों कर्मचारी क्या काम कर रहे थे, इसकी जानकारी न तो यूनिवर्सिटी सेंटर के पास है और न ही विभाग को।

- एक साल से कर्मचारी यूनिवर्सिटी में क्या काम देख रहे थे, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। मूल विभाग में बुलाने में देरी पर कुछ नहीं कह सकता।
- सुधांशु वर्मा, जिला संयोजक, आदिम जाति कल्याण विभाग

 

Posted on : Monday May 04, 2009 09:16 AM इंदौर न्यूज़ डाटकाम

 

 

 

 
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