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दस दिन की बच्ची का
मोतियाबिंद का ऑपरेशन
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इंदौर. एमवाय अस्पताल
में उस समय विचित्र स्थिति रही जब डॉक्टरों को दस दिन की बच्ची का
मोतियाबिंद का ऑपरेशन करना पड़ा। उसका मोतिया सफेद था और सूरज की किरणों
रेटिना तक नहीं पहुंच रही थीं। इतनी छोटी बच्ची को एनेस्थीसिया देना उनके
सामने मुख्य चुनौती थी। ऑपरेशन के बाद वह अब पूरी तरह स्वस्थ है। डॉक्टरों
की मानें तो इतनी छोटी बच्ची की सर्जरी का शहर में यह पहला केस है।
बच्ची के ऑपरेशन को लेकर डॉक्टर पसोपेश में थे। ऑपरेशन में एनेस्थीसिया
देना ही सबसे बड़ी रिस्क थी। दस दिन पहले शहनाज बी की प्रसूति हुई थी।
जन्म से ही बच्ची को मोतियाबिंद था। माता-पिता भी ऑपरेशन के लिए तैयार हो
गए। सामान्यत: जो बच्चे जन्म से मोतियाबिंद से पीड़ित होते हैं उनका
ऑपरेशन जल्द नहीं किया जाता। बच्चे के दो महीने का होने तक इंतजार किया
जाता है।
इसलिए किया ऑपरेशन
यूनिट हेड डॉ. पुष्पा वर्मा कहती हैं हमें इसलिए ऑपरेशन करना पड़ा क्योंकि
बच्ची का मोतिया पूरा सफेद था। लेंस नजर नहीं आ रहा था, सूरज की किरणों
भी रेटिना पर नहीं पड़ पा रही थीं। इसे हटाना जरूरी था क्योंकि इससे बच्ची
की नजर का विकास रुक जाता।
इसलिए होता है
डॉक्टर्स का कहना है उम्र के साथ लोगों में यह समस्या आम है लेकिन कुछ
बच्चे जन्म से ही इससे ग्रसित होते हैं। गर्भ में ही लेंस का निर्माण होता
है। पोषक तत्वों की कमी से यह बीमारी होती है।
ये थे टीम में
डॉ. वर्मा के साथ डॉ. श्वेता सिंह, डॉ. प्रीति मेश्राम, डॉ. श्याम गुप्ता,
डॉ. रचना जैन, डॉ. अमित यादव, डॉ. नितिन महाजन, डॉ. प्रणय जैन व
एनेस्थीसिया विभाग के मनोज और डॉ. सीमा टीम में शामिल थे।
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| समाचार साभार - दै. भा.
04/24/2009 10:05 AM |
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