“भारत बना विश्व की सर्वश्रेष्ठ अंतरिक्ष शक्ति”

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mission shakti india 2019
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अमेरिका रूस और चीन को पीछे छोड़ भारत बना अंतरिक्ष में सबसे बड़ी शक्ति

बुधवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक ट्वीट ने सबकी नजरों को टीवी चैनल पर टिका दिया। भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा एक ट्वीट में कहा गया कि वे 11:45 से 12:00 के बीच देश के लोगों को एक महत्वपूर्ण संदेश देंगे।

हर कोई यह जानने के लिए बेसब्र नजर आया कि पीएम मोदी क्या ऐलान करने वाले हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बताया था। ‘मैं देश को एक महत्पूर्ण संदेश 11:45 से 12:00 बजे के बीच जारी करूंगा।

आप टेलिविजन, रेडिया और सोशल मीडिया पर देखें।’ इससे पहले प्रधानमंत्री आवास पर कैबिनेट की सुरक्षा समिति के साथ एक बैठक हुई थी साथ ही प्रधानमंत्री की मुलाकात राष्ट्रिय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से भी हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए घोषणा की, कि भारत एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बन गया है। और हमारे वैज्ञानिकों ने एक नई मिसाइल का परीक्षण किया है।

प्रधान मंत्री ने घोषणा की, कि एक लाइव लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रह, जो पूर्व में तय लक्ष्य से 300 किमी दूर बाहरी अंतरिक्ष में था। उसे एंटी-सैटेलाइट मिसाइल सिस्टम (ASAT) द्वारा मार गिराया गया था।

उन्होंने जानकारी दी कि “केवल तीन मिनट के भीतर एक ASAT उपग्रह का उपयोग करके लाइव उपग्रह को नष्ट कर दिया गया। और इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को ‘मिशन शक्ति’ का नाम दिया गया।

” मिशन शक्ति एक बहुत ही कठिन ऑपरेशन था। इसके लिए उच्च स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता थी। वैज्ञानिकों ने इस ऑपरेशन में सभी निर्धारित लक्ष्य हासिल किए हैं।

उन्होंने घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत दुनिया में ऐसा करने वाला चौथा देश है।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने कुछ कम पृथ्वी की कक्षाएँ लॉन्च की थीं, जिनकी पुष्टि उन्होंने DRDO के उद्देश्यों के लिए की थी।

परन्तु उनमे से एक उपग्रह अपनी निर्धारित सीमा से बाहर चला गया था। सुरक्षा के दृश्टिकोण से यह देश के लिए खतरा साबित हो सकता था। इसलिए उसे नष्ट किया गया।

रोचक बात यह है, की इस कार्य के लिए जिस मिसाइल का उपयोग किया गया वह भारत में ही निर्मित है।

मनोरंजन, शिक्षा, आपदा प्रबंधन, रक्षा और इत्यादि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उपग्रहों के महत्व पर समझते हुए मोदी जी ने कहा, “दुनिया में, अंतरिक्ष और उपग्रहों का महत्व अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ता रहेगा।

शायद उनके बिना जीवन में प्रबंधन करना मुश्किल होगा। अतः इन मशीनों की सुरक्षा करना महत्वपूर्ण है। आज की ASAT मिसाइल भारत को नई ताकत देगी।

मैं दुनिया को भी बताना चाहता हूं, यह नया कौशल किसी के खिलाफ नहीं है। यह एक रक्षा कदम है। भारत हमेशा से अंतरिक्ष में हथियारों के खिलाफ रहा है। यह नीति नहीं बदली है। यह परीक्षण किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन नहीं है। यह केवल इस देश और इस क्षेत्र के नागरिकों की सुरक्षा के लिए है। ”

उन्होंने कहा, “इस कदम को शांति और सुरक्षा की दिशा में एक कदम के रूप में देखें। भविष्य की चुनौतियों के लिए आगे बढ़ना और खुद को तैयार करना महत्वपूर्ण है। ”

एक एंटी-सैटेलाइट मिसाइल सिस्टम का उद्देश्य दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट करना और दुश्मनों को सैनिकों के साथ संवाद करने या आने वाली मिसाइलों और टुकड़ी आंदोलनों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी तक पहुंचने से रोकना है। कुछ साल पहले अपना ASAT परीक्षण कार्यक्रम शुरू करने वाले चीन ने भारत को अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया था

मोदी की घोषणा को चीन के बढ़ते अंतरिक्ष सैन्य कार्यक्रम के काउंटर के रूप में देखा जा सकता है। चीन ने 2013 में अपना एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण किया था

जब उसने अपनी नई ASAT (एंटी-सैटेलाइट) मिसाइल, डोंग नेंग -2 या DN-2 लॉन्च की थी, और 2015 में, एक उपग्रह-मार करने वाली मिसाइल DN-3 का परीक्षण किया था, जिसे अमेरिकी अंतरिक्ष संपत्ति के लिए एक खतरे के रूप में देखा जाता है।

2012 में, DRDO के तत्कालीन प्रमुख वीके सारस्वत ने घोषणा की थी कि भारत के पास कम पृथ्वी और ध्रुवीय कक्षाओं में उपग्रहों से निपटने के लिए एक एंटी-सैटेलाइट हथियार बनाने के लिए ब्लॉक हैं।

मौजूदा अंतरिक्ष संधियां देशों को अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर विनाश के हथियार रखने से रोकती हैं, लेकिन अन्य देशों जैसे एएसएटी जैसे सामरिक हथियारों को रखने से देशों की जांच नहीं करती हैं।

ASAT का उपयोग अंतरिक्ष प्रणालियों पर साइबर-हमले, विद्युत चुम्बकीय पल्स विस्फोट उपकरण, निर्देशित ऊर्जा हथियार और अन्य उपग्रहों को नष्ट करने के लिए लक्षित मिसाइलों आदि के लिए किया जा सकता है।

अंरिक्ष विज्ञान में भारत पहले से ही विश्व क एक बड़ी शक्ति है। परन्तु “मिशन शक्ति” के बाद देश ने अंरिक्ष विज्ञानं के लगभग हर क्षेत्र में अपना परिचम लहराया है। साथ ही यह विश्व की सबसे बड़ी मिसाइल टेक्नोलॉजी के रूप में उभरा है।

हालाँकि भारत की निति बिलकुल साफ़ है, की हमारी शक्तिया संपुर्ण विश्व में शांति स्थापित करने के लिए है, ना की मानवता के नाश के लिए। परन्तु जो देश आतंक के क्षेत्र में सक्रीय है, यह उनके लिए एक चेतावनी है, की वो भारत की शक्तियों को कम आँकने की भूल न करें।

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