खजराना गणेश मंदिर इंदौर -मंदिर जो करे मुरादें पूरी!

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khajrana ganesh mandir indore
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मंदिर और पूजा पाठ हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रहे है। यही कारण है की भारत मंदिरो का देश रहा है। मंदिर भारतीय संस्कृति में सिर्फ पूजा पाठ का स्थान मात्रा नहीं रहा है।प्राचीन समय में यह शिक्षा और संस्कार प्रमुख स्त्रोत रहा है।

यदि हम बात करे भारतीय देवी देवताओ में तो सर्वप्रथम स्थान आता है। भगवन गणेश का किसी भी कार्य की शुरुआत , भारतीय परम्पराओ में भगवन गणेश के नाम से ही होती है।

इसलिए भारत के प्रत्येक शहर में एक ऐसा मंदिर अवस्य मिल ही जाता है, ठीक ऐसा ही एक प्रसिद्ध मंदिर है मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में जो की इंदौर शहर के खजराना इलाके में स्थित है जो की खजराना गणेश मंदिर के नाम से पुरे देश में प्रसिद्ध है।

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पहुंचने का मार्ग

यह मंदिर विजय नगर से कुछ दूरी पर खजराना चौक के पास में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण अहिल्या बाई होल्कर ने करवाया था। मंदिर में भगवान गणपति की मुख्य मूर्ति केवल सिन्दूर द्वारा निर्मित है।

इस मंदिर में गणेश जी के अतिरिक्त माता दुर्गा जी, महाकालेश्वर की भूमिगत शिवलिंग, गंगा जी की मगरमच्छ पर जलधारा मूर्ति, लक्ष्मी जी का मंदिर, साथ ही हनुमान जी के भी मंदिर है।

गणेश जी के अतिरिक्‍त यहां पर शनि देव और साई नाथ का भी भव्य मंदिर विराजमान है। यही कारण है इस स्‍थान पर आने वाले इतने सारे देवताओं के बीच अपने को देवलोक में भ्रमण करता हुआ अनुभव करते हैं।

मंदिर की सारी व्यवस्था बहुत ही उत्तम कोटि की है। इस मंदिर में 10,000 से अधिक लोग प्रति दिन दर्शन करते है। मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अतिरिक्त अन्य 33 अन्‍य छोटे-बड़े हैं।

कैसे हुआ निर्माण्

sindoor ganesh murti -khajrana indore

इस मंदिर के बारे में एक कथा काफी प्रचलित है कि सन 1735 के करीब पंडित मंगल भट्ट के स्वप्न में गणेश जी आए थे, और उन्होंने इस स्थान से प्रकट होकर जनता का उद्धार करने की बात कही थी।

इसके बाद एक कलश श्री गणेश प्रकट हुए और उनका मंदिर पूर्ण विधिविधान से स्थापित किया गया। तब से यहां देश ही नहीं विदेश से भी श्रद्धालुजन अपना शीर्ष नवाने आते रहे हैं।

प्रसिद्धि का कारण

इस मंदिर के बारे में प्रसिद्ध है कि यहां हर किसी की मुराद पूरी होती है। यहां जो भी भक्त अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिये गणेश जी के पीठ पर उल्टा स्वास्तिक बनाता है, गणपति जी उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।

मनोकामना पूर्ण होने के पश्चात पुनः सीधा स्वास्तिक बनाने भक्‍त यहां आते हैं। इसी तरह मुराद मन में रखकर यहां धागा बांधने की भी परंपरा है। इच्‍छा पूर्ण होने पर वह धागा खोल दिया जाता है।

विशेष महत्व

वैसे तो भगवान गणेश की पूजा-अर्चना हर शुभ कार्य करने से पहले की जाती है, लेकिन खजराना गणेश मंदिर में भक्तों की सबसे अधिक भीड़ बुधवार को होती है। बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करने के लिए भक्त दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। इस दिन यहां विशेष आरती आयोजित की जाती है।

कुल मंदिरो की संख्या

खजराना गणेश मंदिर परिसर में 33 छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं। यहां भगवान राम, शिव, मां दुर्गा, साईं बाबा, हनुमानजी सहित अनेक देवी-देवताओं के मंदिर हैं। मंदिर परिसर में पीपल का एक प्राचीन पेड़ भी है। इस पीपल के पेड़ के बारे में मान्यता है कि यह मनोकामना पूर्ण करने वाला पेड़ है।

गणेश मंदिरो में सबसे धनी

देश के सबसे धनी गणेश मंदिरों में खजराना गणेश मंदिर का नाम भी सबसे आगे लिया जाता है। यहां भक्तों की ओर से चढ़ावे के कारण ही मंदिर की कुल चल और अचल संपत्ति बेहिसाब है।

इसके साथ ही शिर्डी स्थित साईं बाबा, तिरुपति स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर की तर्ज पर श्रद्धालुजन यहां भी ऑनलाइन भेंट चढ़ावा अर्पण करते हैं। मंदिर की दानपेटियों में से विदेशी मु्द्राएं भी हर साल अच्छी खासी संख्या में निकलती हैं।


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पर्यटन में महत्व

पर्यटन की दृस्टि से यह मंदिर अत्यधिक महत्वपूर्ण है ,यह देश विदेश से भारी संख्या में लोग आते है, इसलिए यह पर्यटन का महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है। उत्कृष्ट व्यवस्था होने के बाद भी यहा दर्शन करना थोड़ा कठिन होता है।

क्युकी यहा भक्तो की संख्या बहुत अधिक होती है यहा भक्त अपने पुरे परिवार के साथ विग्नहर्ता के दर्शन करने पधारते है और अपनी मनोकामना पूर्ण होने के लिए बाप्पा को अपनी अर्जी देते है।
यह मंदिर प्रतिदिन सुबह ५ बजे से दोपहर २ बजे तथा सशाम ४ बजे से रात्रि ८ बजे तक खुला रहता है।

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