राजवाड़ा -एक महल या संघर्ष!

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Rajwada-Indore
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राजवाड़ा एक महल मात्र नहीं बल्कि संघर्षो के बीच एक खड़ा हुआ एक ऐैसा निर्माणकार्य है जो की स्वयं की कहानी खुद बंया करता है 

आइये जानते है इस भवन का इतिहास जो की अमरता प्राप्त है और साथ ही यह की वो भव्यता जो आज भी बनी हुई है

राजवाड़ा महल, इंदौर पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। रजवाड़ा, होलकर राजवंश के शासकों की ऐतिहासिक हवेली है। इस महल का निर्माण लगभग 200 साल पहले हुआ था और आज तक यह महल पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण रखता है।

इस महल की वास्‍तुकला, फ्रैंच, मराठा और मुगल शैली के कई रूपों व वास्‍तुशैलियों का मिश्रण है। यह इमारत, शहर के बीचों-बीच शान से खड़ी है जो सात मंजिला इमारत है। इस महल का प्रवेश बेहद सुंदर व भव्‍य है। एक महान तोरण, महल के प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है।

लकड़ी और लोहे से निर्मित राजसी संरचना से बना महल का प्रवेश द्वार यहां आने वाले हर पर्यटक का स्‍वागत करता है। यह पूरा महल लकड़ी और पत्‍थर से निर्मित है। बड़ी – बड़ी खिड़कियां, बालकनी और गलियारे, होलकर शासकों और उनकी भव्‍यता का प्रमाण है। इंदौर आने वाले हर पर्यटक को रजवाड़ा अवश्‍य आना चाहिए।

इंदौर में बना ये राजबाड़ा यहां की शान कहलाता है। इसके बनने से लेकर कई खास बातें हैं। । कई बार टूटा लेकिन फिर से खड़े हुए इंदौर के इस राजबाड़े के बारे में। 1984 में इंदिरा गांधी की मौत के बाद हुए दंगों में इसे जला दिया गया था।

पुरातत्व विभाग संग्रहालय के अध्यक्ष प्रकाश परांजपे के अनुसार, 5 तथ्य राजबाड़ा के निर्माण और इतिहास से

मल्हारराव होलकर को तीन अक्टूबर 1730 को मराठों ने उत्तर भारत के सैनिक अभियानों का नेतृत्व दिया। सैनिक अभियानों की व्यस्तता के कारण उन्होंने स्थायी निवास के लिए खासगी जागीर देने के लिए छत्रपति साहू से निवेदन किया। पेशवा बाजीराव ने सन् 1734 ई में मल्हार राव की पत्नी गौतमाबाई होल्कर के नाम खासगी जागीर तैयार करवायी, जिसमें इंदौर भी था।

सन् 1747 में भव्य राजप्रसाद के निर्माण शुरू किया जो राजबाड़ा कहलाया। यह बन भी न पाया था कि 1761 ई में अब्दाली के हाथों हुई पराजय को मल्हारराव सह न सके और 1765 ई. में नहीं रहे। उत्तराधिकार मल्हार राव की पुत्रवधू अहिल्याबाई को मिला। उन्होंने अपनी राजधानी महेश्वर बनाई।

इंदौर में बना ये राजबाड़ा यहां की शान कहलाता है। इसके बनने से लेकर कई खास बातें हैं। कई बार टूटा लेकिन फिर से खड़े हुए इंदौर के इस राजबाड़े के बारे में। 1984 में इंदिरा गांधी की मौत के बाद हुए दंगों में इसे जला दिया गया था।

पहले अहिल्याबाई का 1795 में और 1799 में तुकोजीराव की मृत्यु के पश्चात होल्करों के गृहयुद्ध में यशवंत राव (प्रथम) ने सफलता प्राप्त की और अपनी राजधानी भानपुरा बनाई। सिंधिया सेनापति सरजेराव घाटगे ने इंदौर पर हमला किया। महानुभाव पंथ के मंदिर की वजह से घाटगे ने दक्षिणी भाग को छोड़कर राजबाड़ा जला कर नष्ट कर दिया।

rajwada fort

यशवंतराव की मृत्यु के पश्चात उनकी पत्नी तुलसाबाई ने अवयस्क पुत्र मल्हार राव (द्वितीय की संरक्षिका की हैसियत से शासन किया। सन् 1717 ई में महिदपुर युद्ध के उपरांत सन् 1818 ई में हुई मंदसौर संधि की शर्त के अनुसार, होल्करों ने इंदौर को राजधानी बनाया और होल्कर परिवार इंदौर लाया गया।

मल्हारराव के शासनकाल में उनके प्रधानमंत्री तात्या जोग ने पुन: राजवाड़ा का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जो हरि राव (1834-1843) के शासन काल में पूर्ण हुआ। सन् 1834 ई में पुन: यह अग्निकांड का शिकार हुआ। सन् 1984 ई में भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए देशव्यापी दंगों में यह स्मारक पुन: अग्निकांड की भेंट चढ़ गया।

शहर के मध्य 6175 वर्गमीटर में 29 मीटर की ऊंचाई वाली इस इमारत को बनाने में मल्हा राव होलकर द्वितीय के समय चार लाख रुपए खर्च किये गये। 918 फुट लंबी और 232 फुट चौड़ी इस इमरात का आकर्षक प्रवेश द्वार 6.70 मीटर ऊंचा है जिसकी संरचना हिंदू शैली के राजप्रासादों की तरह है।

सात मंजिलों का निर्माण है जिसमें सुंदर झरोखे बनाए गये हैं। इन मंजिलों में प्रथम तीन तल प्रस्तर के राजपूत शैली तथा काष्ठ निर्मित हैं। शेष चार मंजिलें मराठा शैली के प्रतीक हैं।

वर्तमान में अवशिष्ट गणेश हाल जो वस्तुत: होलकरों का दरबार हाल है वह फ्रेंच क्लासिक शैली से निर्मित है। इस भवन में पूर्वी भाग को छोड़कर शेष भाग में तीन मंजिलें थी जिनमें कई कक्ष थे। कई कक्षों में सुंदर भित्ति चित्र बनाए गये थे जो कक्षम, नाथ द्वार, कोटा, बूंदी, एवं मालवा शैली के संयोजन में निर्मित थे।

यह तो हुआ इसका ऐतिहासिक महत्व और निर्मण प्रक्रिया परन्तु इसके अलावा इसका एक और स्वरुप है जो की अपने आप में अनोखा है और एक अलग तरह की छटा समाहित किये हुए है वह है इसका बाजार जो की है तो एक सामान्य बाजार की तरह ही परन्तु यँहा की जो ऊर्जा है वह अपने आप में एक उच्चकोटि की है

इंदौर के शाही महल राजवाड़ा के चारों ओर घूमते हुए, आप महसूस कर सकते हैं कि इंदौर में विकसित चीजों में से एक राजवाड़ा का बाजार है। एक मॉल की तरह, संबंधित श्रेणियों के लिए विभिन्न मंजिलें हैं;

राजवाड़ा उस मामले के लिए पूरी गलियों को अलग-अलग वर्गों को समर्पित करता है। हम आपके लिए 10 ऐसी चीजें लेकर आए हैं जो रजवाड़ा को किसी भी शॉपिंग मॉल के बराबर बनाती हैं।

राजवाड़ा का विशाल फैशन मार्ट

राजवाड़ा में उपलब्ध कपड़ों में एक अलग इंदौरी शैली है। कपड़े का हर टुकड़ा उस इंदौरी को छू जाता है, जिसके लिए कोई भी इंदौरी गिर जाए। यह सिर्फ ऐसा नहीं है कि बाजार फैशन की दुनिया में नवीनतम रुझानों के साथ हाथ से जाता है, आपको विशेष फैशन भी मिलेगा जिसे आप प्रयोग कर सकते हैं।

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. सर्राफा रत्रि बाजार – राजवाड़ा की फूड स्ट्रीट

किसी भी मॉल के लिए एक विशाल भोजन कोने का होना लगभग आवश्यक है। राजवाड़ा ने भी इसका ध्यान रखा और न केवल एक कोने, बल्कि इंडोरियों की भूख को संतुष्ट करने के लिए एक पूरी गली समर्पित की।

सर्राफा रात्रि बाज़ार, विजय चाट घर और अन्य कई चाट कोनों, मीठे व्यंजनों की छोटी दुकानों के साथ, यह अपनी स्वाद कलियों को खिलाने के लिए सबसे अच्छा और इंदौर का पसंदीदा स्थान है।

बड़ा सर्राफ – एक गहना सूक

राजवाड़ा शुद्धता में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए गोल्ड और सिल्वर ज्वैलरी के लिए एक सूक भी देता है। बड़ा सर्राफा और छोटा सर्राफा इन कीमती वस्तुओं को खरीदने के लिए विशाल बाजार हैं। छोटी विश्वसनीय स्थानीय दुकानों के अलावा, आपको अच्छी तरह से स्थापित हॉलमार्क वाले सोने के शोरूम भी मिलेंगे।

आड़ा बाजार – सामान के लिए बाजार

एक बार जब आप आरा बाज़ार में प्रवेश करते हैं, तो यह ऐसा होता है जैसे आपने किसी मॉल की विशाल सहायक दुकान में कदम रखा हो, बस बेहतर और सस्ता। हर अवसर के लिए उपलब्ध अंतहीन किस्में। एक पार्टी के लिए, एक दुल्हन के लिए, एक शादी के लिए, और यहाँ तक कि नवरात्रि के त्योहार के लिए भी !!

बड़ा सर्राफा, छोटा सर्राफा, सोने और चांदी का बाजार

सीतालमाता बाजार – पारंपरिक वस्त्र बाजार

हम परम्पराओं की सराहना करते हैं, विशेष रूप से पारंपरिक पहनावे की! सीतालामाता बाजार में साड़ियों, पोशाक सामग्री, लेहेंगा चुनरी और दुल्हन पहनने का एक विशाल सुरुचिपूर्ण संग्रह उपलब्ध है। दुकानों में रंगीन संयोजन और आश्चर्यजनक डिजाइन हैं।

बजाज खान चौक – बुटीक स्ट्रीट

अगर आप अपनी पुरानी या बोरिंग प्लेन साड़ी या सलवार सूट को संशोधित करना चाहती हैं, तो अपने आउटफिट में लैटन्स और खूबसूरत बॉर्डर जोड़ें, बजाज ख़ान चौक आपके लिए स्वर्ग जैसा है। अपने नियमित संगठनों को अद्वितीय संगठनों में बदलने के लिए यह एक वन स्टॉप डेस्टिनेशन है।

बच्चों का खेल क्षेत्र और ठंड लगने का क्षेत्र

यदि आप राजवाड़ा बाजार की खोज करने के लिए कुछ खरीदने या थकने के मूड में नहीं हैं, तो राजवाड़ा महल के ठीक सामने एक छोटा बगीचा स्थित है, जहाँ आप बैठ सकते हैं, आराम कर सकते हैं और शानदार महल की सुंदरता देख सकते हैं। अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा बगीचे के अंदर लंबी और गर्व से खड़ी है।

खजुरी बाजार –

पुस्तक घोंसला इंदौर के पुस्तक प्रेमियों के लिए खजूरी बाजार एक विशाल खुली लाइब्रेरी की तरह है। उपन्यास, विश्वकोश और हर शैली की विभिन्न पुस्तकें उपलब्ध हैं। सिर्फ इन किताबों की ही नहीं, यह रियायती दरों पर स्कूल की किताबों की खरीद के लिए वन स्टॉप मार्केट है और पुरानी किताबों को दोबारा पढ़ने के लिए भी प्रावधान है।

अवसरों पर सजावट

किसी भी अन्य मॉल की तरह, शानदार महल रोशनी से जगमगाता है, खासकर स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और दिवाली पर। सजे हुए महल का नजारा आपके मन, दिल और आत्मा को प्रसन्न कर देता है।

rajwada fort in indore

सब्जी और फल:

सब्जी मंडी राजवाड़ा के बिग बाजार की तरह है जिसमें आपको ताजी सब्जियां और रसीले फल मिलते हैं। और अंदाज लगाइये क्या! मॉल के विपरीत, आप भी सौदा करने के लिए मिलता है!

इंदौर, नालियाखाल, मंडी, बाजार, रजवाड़ा – इंदौरएचडी का फल बाजार यदि आप राजवाड़ा को होल्कर राजवंश से सिर्फ एक स्थापत्य विरासत के रूप में देख रहे हैं, तो हमने आपको इस स्मारक और आस-पास के क्षेत्र को देसी शॉपिंग मॉल के रूप में पुनर्विचार और बड़े पैमाने पर बनाने का पर्याप्त कारण दिया है!

जैसा की हमने देखा राजवाड़ा उसका ऐतिहासिक महत्व और निर्माण प्रक्रिया साथ ही उसका बाजार परन्तु मेरा दृश्टिकोण कुछ और ही है ! वह है ,इसका संघर्षपूर्ण निर्माण यह एक भवन मात्र नहीं है, बल्कि विध्वंश और निर्माण की एक प्रक्रिया है जिसमे निर्माण विजय रहा !

यह सन्देश देता है की विध्वंशकारी शक्तिया कितनी ही प्रबल क्यों न हो परन्तु जीत हमेशा सच और अच्छाई की ही होती है !

साथ ही यह महल और यह का बाजार सत्ताधीशो और सामान्य जनता के बीच की नजदीकियां भी दर्षाता है, महल की दीवारें चाहे कितनी भी ऊँची क्यू न हो परन्तु जनसामान्य की आवाज गद्दीधारियो तक पहुंच ही जाती है जो की यह दर्शाता है , की यह शासन नहीं बल्कि सेवा की गयी थी !

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