सराफा बाजार इंदौर

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इंदौर का एक प्रमुख आकर्षण जो की सराफा बाजार के नाम से जाना जाता है , सराफा बाजार इंदौर के बीचों बीच इस्थित एक अद्वितीय जगह है, जो की आज के समय में पर्यटन दृस्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सराफा बाजार एशिया का एकलौता ऐसा बाजार है , जो दिन में सोने के आभूषणो का तथा रात्रि में खाने पीने की वस्तुओं के बाजार में रूपांतरित हो जाता है

कैसे पहुंचे- सराफा बाजार रेलवे स्टेशन से २ किमी बस स्टैंड से ४ किमी तथा एयरपोर्ट से ६ किमी की दुरी पर है जहा पर ऑटो, कार तथा रिक्शा की सहायता से आसानी से पंहुचा जा सकता है, परन्तु यह निजी कार से जाना थोड़ा काठीन हो सकता है क्युकी यह भीड़ बहुत अधिक संख्या में होती है।

बाजार का समय – आभूषणो के बाजार के खुलने का समय सुबह १० बजे है परन्तु रात्रि ८ बजे से यह एक अनोखी दुनिया में बदल जाता है जो की रात्रि के २ बजे तक एक जैसी भीड़ समाये हुए रहता है।

मुख्य आकर्षण -जैसा की हम पहले ही जान चुके है, दिन के समाय अद्भुत कारीगरी और हमारी सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करते स्वर्ण आभूषण जो की मानव समाज के क्रमिक विकाश के साथ -साथ आज के दौर के पहनावे का समावेश किये हुए है।

रात्रि के समय यही सराफा बाजार खाने में उत्क्रष्ट्ता लिए हुए अपने हुनर को प्रदर्शित करता है। यह मिलाने वाले सरे व्यनजन शाकाहारी और स्वाद से भरपूर होते है यही कारन है की यह इतनी बड़ी संख्या में लोगो का जमावड़ा लगता है।

sweets-at-sarafa-bazar indore
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सराफा बाजार में मिलने वाली कुछ विशिष्ट खाद्य व्यंजन सामग्री
भुट्टे की कीस
छोले
चाट
पानीपुरी
दहीबड़ा
गुलाबजामुन
तथा अन्य कयी सामग्री

सर्राफा को कई बार डिस्कवरी चैनल यात्रा से संबंधित वृत्तचित्रों और कई अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया चैनलों में चित्रित किया गया है। सर्राफा इंदौर में सबसे रंगीन जगह है।

भोजन सिर्फ अद्भुत है और उनमें से कई यहां उत्पन्न हुए हैं। (भोजन बहुत मसालेदार हो सकता है, अगर आप इसकी वजह से भारतीय भोजन करते हैं, तो यहां एक सुझाव है।

भारतीय भोजन खाने के लिए बेहतर है) अगर आप इंदौर की यात्रा करते हैं, तो आपको इस जगह पर भी जाना चाहिए। सभी भोजन सुपर सस्ते हैं और विविधता सिर्फ शानदार है।

इस जगह पर हमेशा भीड़ रहती है, और जीवित रहने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप इन जगहों पर घूमें और फिर अपने दो पहिया वाहन लेकर आएं। चार व्हीलर इस क्षेत्र में शामिल नहीं हैं।

मेरा विचार – अगर देखा जाये तो यह एक जगह मात्रा है, जहा पर सिर्फ कुछ आभूषण और खाने के लिए कुछ व्यनजन मात्र मिलते है पर ये सिर्फ यह तक सिमित नहीं है ।

यदि हम ध्यान दे तो हमारी सांस्कृतिक धरोहर के साथ -साथ हमारे सामाजिक जीवन को भी प्रकट करता है। यह दिखता है, की इंदौर की जनता खाने पिने को लेकरकितनि उत्सुक होती है ।

यही कारण है, की यह रात्रि के २ बजे भी उतने ही संख्या में लोग मिलते है जितने की शाम को ८ बजे, इसके साथ ही यह मनुष्यो की मिलनसार प्रवत्ति को भी दर्शाता है, की तेजी से बदलते इस दौर में भी हम कैसे अपनइ परिवार और समाज के साथ जुड़ कर रह सकते है।

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