Us-China Trade War

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वर्तमान समय में विश्व के सभी देशों में सर्वशक्तिशाली बनने की होड़ लगी हुई है, सभी देशों के शत्ताधीश अपने देश को आगे बढ़ते देखना चाहते है। वैसे तो आज अमेरिका और चीन दोनों के एक शक्तिशाली देश है।

फिर चाहे वो हथियारों की बात हो या व्यापर और घरलू उत्पादन की, ऐसे में कोई भी अपनी आर्थिक उन्नति को बढ़ाने की दिशा में ही काम करेगा। इसलिए सारे देश आपस में व्यापार करके, एक दूसरे की आवश्यक्ताओ की पूर्ति करते है।

ताकि वैश्विक व्यापर में संतुलन बना रहे जब दो देशों के बीच व्यापर होता है तो एक देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर कर लगते है ताकि घरेलु उत्पादों की मांग बाजार में बड़ी रहे

ट्रेड वॉर क्या है ?

ट्रेड वॉर एक प्रकार का  कारोबार के ज़रिए युद्ध होता हैं. जिसमे किसी दूसरे युद्ध की तरह एक देश दूसरे पर हमला करता है। साथ ही दूसरा देश पलटवार के लिए तैयार रहता है।

इसमें जंग हथियारों की जगह करों (टैक्स ) का इस्तेमाल करके लड़ी जाती है, इसमें  विदेशी सामान को निशाना बनाया जाता है, ऐसे में जब एक देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर टैरिफ़ यानी कर बढ़ाता है।

तो दूसरा देश भी इसके जवाब में ऐसा ही करता है और इससे दोनों देशों में टकराव पैदा होता है, इससे देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं जिससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ता है, और यह राजनैतिक तनाव शस्त्र युद्ध में भी रूपांतरित हो सकता है।

साथ ही दूसरा देश पलटवार के लिए तैयार रहता है, इसमें जंग हथियारों की जगह करों (टैक्स ) का इस्तेमाल करके लड़ी जाती है। इसमें  विदेशी सामान को निशाना बनाया जाता है।

ऐसे में जब एक देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर टैरिफ़ यानी कर बढ़ाता है, तो दूसरा देश भी इसके जवाब में ऐसा ही करता है और इससे दोनों देशों में टकराव पैदा होता है। इससे देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं।

जिससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ता है, और यह राजनैतिक तनाव शस्त्र युद्ध में भी रूपांतरित हो सकता है।

 ट्रेड वॉर की शुरुआत कैसे ?

जब से डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका की गद्दी पर बैठे है, वो अमेरिका वासियो के हित में निरंतर बड़े कदम उठा रहे है।अमेरिकी आईटी सेक्टर में अमरीकी लोगों को रोजगार भी, उनमे से एक कदम है।

अमेरिका चीन ट्रेड वॉर का भी मुख्य कारण यही है, की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प स्वदेशी वस्तुओं की मांग अमेरिकी बाज़ारों में बढ़ाना चाहते है, जिससे अमेरिकी उत्पादन और खपत दोनों बढ़ेगी साथ ही अमेरिकी लोगो को रोजगार मिलेगा।

अमेरिकी आईटी सेक्टर में अमरीकी लोगों को रोजगार भी उनमे से एक कदम है,अमेरिका चीन ट्रेड वॉर का भी मुख्य कारण यही है, की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प स्वदेशी वस्तुओं की मांग अमेरिकी बाज़ारों में बढ़ाना चाहते है, जिससे अमेरिकी उत्पादन और खपत दोनों बढ़ेगी साथ ही अमेरिकी लोगो को रोजगार मिलेगा।

पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ व्यापार असंतुलन पर मोर्चा खोल दिया, उन्होंने बड़ी व्यापारिक फेरबदल किये, जिसमें चीनी वस्तुओं के आयात पर 60 अरब डॉलर का शुल्क (आयात कर ) लगा दिया गया।

चीन ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी वस्तुओं के आयात पर तीन अरब डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा कर दी, 25 साल के इतिहास में चीन के साथ अमेरिका की ये सबसे तीखी व्यापारिक तनातनी है।

माना जा रहा है, कि ये तनाव एक नए किस्म के वार में बदल सकता है। जिससे की साडी दुनिया की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। क्यूँकि ये दोनों देश विश्व व्यापर में बहुत अधिक भागीदारी रखते है।

हालांकि ट्रंप ने व्यापर जगत में चीन की घेराबंदी कर ली है। अमेरिका का कहना है, की चीन व्यापर नियमों का उलंघन कर रहा है। तथा पेटेंट की अनदेखी के साथ चीन गुढ़वत्ता पर ध्यान नहीं दे रहा है।

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