योगा पोज़ेज़ फॉर बैक पेन

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Yoga for Back Pain
Yoga for Back Pain

भागदौड़ भरे युग में सही दिनचर्या न होने , से कई बीमारिया शरीर में घर कर लेती है ठीक ढंग से न सोने की आद,या फर नींद पूरी न लेने से, या एक ही स्थिति में काफी देर तक बैठे रहने से बैकपेन होना सामान्य बात है

आज हम देखेंगे की कैसे योग की सहायता से बैकपेन पर सामान्य तरीके से काबू पाया जा कसता हैउससे पहले जानते है, योग क्या है और क्यों जरुरी है

स्वस्थ तन और स्वस्थ मन हर किसी की चाह होती है। परन्तु यह यूँही संभव नहीं हो सकता क्यूंकि आज व्यक्ति के पास धन तो है, परन्तु कितना आधिक धन क्यूँ  न हो, आज हम अपना खान पान शुद्ध रखने में विफल है। मिलावट और तेजी से बढ़ते प्रदुषण ने हमारी उम्र छोटी कर दी है।

आज आवश्यकता है, इस बदलते दौर में कुछ ऐसा करने की जिससे हम निरोगी जीवन का आनंद ले सकें। यह चीज भी संभव है, की हम बिना दवाइयों और औषधियों के अपने जीवन को सुचारु रूप से चला सके।

यह सब संभव है, योग की सहायता से, यह एक ऐसा वैज्ञानिक क्रिया कलाप है।जिसके तहत हम दैनिक जीवन में आने वाली बीमारियों के, साथ गंभीर बीमारियों से कोसो दूर रह कर एक स्वस्थ जीवन जी सकते है। साथ ही एक स्वस्थ समाज की नींव  रख सकते हैं।

1) मार्जरासन
2) पूर्व भुजंगासन
3) शलभासन
4) पवनमुक्तासन

मार्जरासन करने की विधि

Marjrasan Pose 1

अपने घुटनों और हाथों के बल आये और शरीर को एक मेज़ कई तरह बना लें अपनी पीठ से मेज़ का ऊपरी हिस्सा बनाएं और हाथ ओर पैर से मेज़ के चारों पैर बनाएं।

अपने हाथ कन्धों के ठीक नीचे, हथेलियां ज़मीन से चिपकी हुई रखें और घुटनो मेँ पुट्ठों जितना अंतर रखें।
गर्दन सीधी नज़रें सामने रखें।


Marjrasan Pose 2

सास लेते हुए अपनी ठोड़ी को ऊपर कि ओर सर को पीछे की ऒर ले जाएँ, अपनी नाभि को जमीन की ऒर दबाएं और अपनी कमर के निचे के हिस्से को छत की ओर ले जाएँ. दोनों पुटठों को सिकोड़ लें।

क्या आप थोड़ा खिंचाव महसूस कर रहें हैं?इस स्थिति को बनाएँ रखें ओर लंबी गहरी साँसें लेते और छोड़ते रहें।


Marjrasan Pose 3

अब इसकी विपरीत स्थिति करेंगे – साँस छोड़ते हुए ठोड़ी को छाती से लगाएं ओर पीठ को धनुष आकार मेँ जितना उपर होसके उतना उठाएं, पुट्ठों को ढीला छोड़ दें।

इस स्थिति को कुछ समय तक बनाएँ रखें और फिर पहले कि तरह मेज़नुमा स्तिथि मेँ आ जाएँ। इस प्रक्रिया को पाँच से छे बार दोहराएं और विश्राम करें।

भुजंग आसन

भुजंग आसन कैसे करें

Bhujangasan

1.भुजंग आसन करने के लिए सर्वप्रथम किसी स्वच्छ और साफ हवादार जगह का चयन कर लें। उसके बाद आसन (चटाई) बिछा कर पेट के बल लेट जाएं।

2.फिर दोनों परों को अच्छी तरह से लंबा कर के फैला दें। और ठोड़ी (chin) ज़मीन पर लगा दें। दोनों कुहनिया (Elbows) दोनों तरफ की पसलियों से सटी हुयी रख कर, दोनों हाथों की हथेलियाँ ज़मीन पर लगा दें।

(Note- याद रहे की आप के हाथों के पंजे सीधे होने चाहिए ओर ज़मीन की और होने चाहिए, तथा दोनों कुहनिया (Elbows) सीधी आकाश की और मुड़ी होनी चाहिए )।

3.भुजंग आसन करते वक्त इस बात का खास ध्यान रखे की दोनों हाथों के पंजे, हमेशा दोनों कंधों के ठीक नीचे (ज़मीन पर) लगे होने चाहिए।

4.अब अपनें सिर को ज़मीन से लगा दें। और फिर अपनी दोनों आँखें बंद कर के सांस शरीर के अंदर भरते हुए धीरे ठोड़ी (chin) को ऊपर उठाएँ, उसके बाद गर्दन को ऊपर आकाश की तरफ उठाएँ। फिर अपनी छाती को धीरे ऊपर उठाएँ। और उसके बाद अपने पेट के भाग को धीरे ऊपर उठा लें।

5.अब आगे, गर्दन को ऊपर की ओर ले जाते हुए पीठ को पीछे की ओर जुकाना है (कमान की तरह )। ऊपर उठनें के लिए शरीर से ज़ोर लगाएं, हाथों पर हो सके उतना कम बल लगाएं। ध्यान में रखें की दोनों पैरों के अग्र भाग को ज़मीन पर लगा कर सामान्य गति से शरीर के अग्र भाग को ऊपर उठने का प्रयत्न करना है।

6.भुजंग आसन की इस मुद्रा में आने के बाद अपनी दोनों आँखें खोलें और श्वसन गति सामान्य बनाए रखें (सांस सामान्य गति से अंदर लें तथा बाहर छोड़ें)। और पहली बार में इस आसन मुद्रा को बीस सेकंड से तीस सेकंड तक बनाए रखिए। फिर ऊपर उठाए शरीर को नीचे की ओर ले जाना शुरू कर दीजिये।

7.शुरुआत में पेट के बल लैट कर जिस मुद्रा से आसन शुरू किया था, उस मुद्रा में लौट जाने के बाद अपनें दोनों हाथों पर अपना सिर टीका कर या ज़मीन से अपना सिर लगा कर उतनी ही देर विश्राम करें, जितनी देर तक भुजंग आसन किया हों।

8.भुजंगासन कर लेने के बाद शवासन कर के थकान मिटा लेनी चाहिए।

शलभासन

शलभासन : प्रक्रिया

Salbhasan

1.साँसअंदर लेते हुए अपना दायाँ पैर उठाएँ। पैर को सीधा रखें। ध्यान दे कि कूल्हे पर झटका न आये।

2.रोकें (स्थिति को बनाये रखें) और साँस लेते रहे।

3.साँस छोड़ें और अपने दाएँ पैर को नीचे रखें।

4.प्रक्रिया अपने बाएँ पैर के साथ दोहराएँ। २-३ गहरी लंबी साँसे लें।

5.दोनों हाथों की मुठ्ठी बनाकर अपने जंघा के नीचे रख दे।

6.साँस अंदर लेते हुए और दोनों घुटनों को सीधा रखते हुए, कुछ गति के साथ दोनों पैरों को जितना हो सकता है उतना उपर उठाएँ।

7.रोकें (स्तिथि को बनाये रखें)

8.साँस छोड़े, अपने दोनों पैरों को नीचे लाएँ, दोनों हाथों को नीचे से हटा लें और विश्राम करें।

9.दूसरे कदम पर हाथों को नीचे रखते हुए पूर्ण प्रक्रिया दोबारा से दोहराएँ।

शलभासन करने के लाभ |

1.पाचन क्रिया को सुधारता है व पेट के अंगो को मज़बूत बनाता है।

2.यह आसन पीठ की मज़बूती व लचीलापन बढ़ाता है।

3.हाथों और कन्धों की मज़बूती बढ़ाता है।

4.गर्दन और कन्धों कि नसों को आराम देता है व मज़बूत बनाता है।

पवनमुक्तासन

Pavanmuktasan

1.अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और पैरों को साथ में कर ले और हाथों को शरीर के साथ जोड़ लें।

2.गहरी लंबी साँस अंदर लें और साँस छोड़ते हुए अपने दाएँ घुटने को अपनी छाती के पास ले कर आएँ। जंघा को हाथों से पकड़ते हुए पेट पर दबाएँ।

3.दोबारा से एक लंबी गहरी साँस ले और छोड़ते हुए अपने सर और छाती को ज़मीन से उठाएँ। अपनी ठोड़ी को अपने दाएँ घुटने से लगाएँ।

4.आसन में रहें और लंबी गहरी साँसे लेते रहें।

5.ध्यान दे: साँस छोड़ते हुए अपने घुटने को हाथों से कस कर पकड़ लें। छाती पर दबाव बनाएँ। साँस लेते हुए, ढीला छोड़ दे।

6.साँस छोड़ते हुए, वापस ज़मीन पर आ जाएँ और विश्राम करें।

7.यह पूरी प्रक्रिया बाएँ पैर के साथ करें और फिर दोनों पैरों के साथ करें।

8.चाहे तो आगे-पीछे थोड़ा झूल सकते है। दाएँ-बाएँ भी ३-५ बार झूल सकते हैं और उसके बाद विश्राम करें।

9.पवनमुक्तासन पद्मसाधना (Padma Sadhana) का हिस्सा है,

लाभ :

1.पीठ व पेट कि मासपेशियों को मज़बूत बनाता है।

2.हाथों व पैरों की मासपेशियों को मज़बूत बनाता है।

3.पेट एवं दूसरे इन्द्रियों की मालिश करता है।

4.पेट में से वायु को निकलता है और पाचन क्रिया में मदद करता है।

5.रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है और पीठ व कूल्हे के जोड़ के हिस्से को तनाव मुक्त करता है।

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