योगा पोज़ेज़ फॉर सर्वाइकल प्रॉब्लम्स

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Yoga for Cervical
Yoga for Cervical

रफ़्तार से भागते इस युग में, आगे निकलने की होड़ लगी हुई है। यही कारण है, की आज व्यक्ति बहुत अधिक काम करता है।  

वैज्ञानिक प्रगति के तहत आज सर्वाधिक कार्य कम्पूटरो के माध्यम से हो रहा है । जँहा निरंतर एक ही स्थिति में बैठ का कार्य करना होता है।

जिसकी वजह से गर्दन में अकड़न आ जाना सामान्य बात है। इसके आलावा भी अन्य कई कारण है, जो गर्दन से सम्बंधित रोगों  को जन्म देते है।

आज हम देखेंगे योग से कैसे इस समस्या से निजात पाई जा सकती है  आइये जानते है कुछ योग के बारे में।

1) सुखासन-साइड स्ट्रेच
2) दत्त मुद्रा
3) सुलभ वक्रासन
4) सिंह मुद्रा

सुखासन

Sukhasan

कार्यविधिः

1.सुखासन करने के लिए भूमि पर दरी या मैट बिछाकर बैठ जाएँ।

2.अब दोनों पैर सामने और सीधे रखें।

3.फिर एक पैर की एड़ी अपने दूसरे पैर की जंघा के नीचे लें आयें और यही क्रम दूसरे पैर के साथ करें। (पालथी मोड़ कर बैठ जाएँ)

4.अब आप अपनी पीठ और मेरूदंड को सीधा करें। ध्यान रहे कि अधिक झुक कर न बैठें।

5.कंधों को थोड़ा ढ़ीला छोड़ें, अब गहरी सांस अन्दर की ओर ले फिर धीरे सांस को छोड़ें।

6.हथेलियों को एक के ऊपर एक अपनी पालथी पर रखें।

7.सिर को थोड़ा ऊपर उठायें और आखे बंद कर लें।

8.अपना ध्यान अपनी श्वसन क्रिया पर लगायें, लम्बी गहरी साँस लेते रहें।

9.अगर प्रारम्भ में कठिनाई आती है तो आप दीवार से टिक कर बैठ सकते

सुखासन के लाभ

1.इस आसन के नियमित अभ्यास से आपको मानसिक सुख और शांति की भी अनुभूति होगी।

2.अगर आप चिंता, अवसाद या अति क्रोध से ग्रस्त हैं, तो इस आसन को करने से बहुत लाभ प्राप्त होगा।

3.इस आसन को करने से चित्त शांत और मन एकाग्रचित्त होता है।

4.यह आसन बैठने की आदत को सुधारता है।

5.यह आसन मानसिक चंचलता को भी कम करता है।

6.यह आसन मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) की परेशानियों से भी मुक्ति दिलाता है।

दत्त मुद्रा

अभ्यास :

1. वज्रासन में बैठें। शरीर सीधा और हाथ जांघों पर है। पूरे शरीर को तनावहीन रखें।

2. पूरक करते हुए बाजुओं को सिर के ऊपर से फैलायें, फिर उनको पीठ के पीछे लायें और बाईं कलाई को दायें हाथ से पकड़ें।

3. रेचक करते हुए शरीर को कूल्हों से आगे झुकायें, पीठ को सीधा रखते हुए,जब तक कि मस्तक फर्श को न छू ले। नितम्ब एडियों पर रहेंगे।

4. सामान्य श्वास के साथ पूर्ण शरीर पर ध्यान दें और तनाव रहित रहें।

5. इस स्थिति में यथा संभव सुविधा से बने रहें।

6. धीरे-धीरे पूरक करते हुए शरीर को सीधा करें। इसी समय बाजुओं को सिर के ऊपर खींचें।

7. रेचक करते हुए प्रारम्भिक स्थिति में लौट आयें।

लाभ :

यह मन और नाडिय़ों को शान्त करता है, सिर की रक्तापूर्ति बढ़ाता है, चित्त एकाग्रता की योग्यता बढ़ाता है एवं पाचन क्रिया को उद्दीप्त करता है।

वज्रासन

वज्रासन कैसे करें – 

Vjrasan

1.हर आसन की तरह वज्रासन करने से पहले भी किसी स्वच्छ, साफ और समथल जगह को चुन कर आसन (चटाई) बिछा कर सामान्य मुद्रा में बैठ जाना होता है।

2.अब अपनें दोनों पैर सामनें की और फैला दें। अब अपने शरीर का वजन बाईं और थोड़ा झुका कर अपनें दाएं पैर को घुटनें से मौड कर दाएं कूल्हे के नीचे लगा दें। और फिर उसी ओर अपने शरीर का वज़न ले जा कर अपनें दूसरे पैर (बाएं पैर) को भी घुटनें से मौड कर बाएं कूल्हे के नीचे लगा दें।

3.ध्यान रहे की आप के दोनों परों के पंजे इस तरह मुड़े होने चाहिए की आप की तशरीफ़ उस के ऊपर आराम से रखी जा सके। पैरों की दोनों ऐडियों में इस प्रकार से अंतर होना चाहिए जिससे दोनों पैरों के अंगूठे एक दूसरे से छूने चाहिए।

4.अब अपनें दोनों हाथों के पंजों को अपनें घुटनों पर लगा दें। दोनों हथेलियाँ (palms) घुटनों की ओर होनी चाहिए)। वज्रासन में बैठ कर शरीर आड़ा-टेड़ा ना करें, शरीर को सीधा रखें।

5.अच्छी तरह से वज्रासन जमा लेने के बाद अपनें शरीर को मुक्त कर लें (Note- मुक्त करना यानी कमर को और कंधों को बैंड नहीं होने देना है, पर सीधे बैठे हुए ही relax फील करना है।)।

6.अब अपनें शरीर में गहरी सांस लें। ध्यान रहे की वज्रासन करते वक्त नाक से ही सांस लेनी है। मुह से सांस अंदर ना जाए, इसलिए बातें करते इस आसन को ना करें।

7.अब अपनी आँखें बंद कर के वज्रासन का आनंद लें, और सामान्य गति से सांस लेते रहें और समयान्तर पर सांस बाहर छोड़ते हैं।

8.शुरुआत में वज्रासन को करने पर पैरों के स्नायुओं में थोड़ा खिचाव महेसूस हो सकता है, पर कुछ दिनों के अभ्यास के बाद एक दम सहजता से यह आसन किया जा सकता है।

सिंहासन

Sinhasan

सिंहासन की सही विधि

1.सिंहासन करने के लिए सबसे पहले अपने पैरों के पंजों को आपस में मिलाकर उस पर बैठ जाएं।

2.फिर दाएं हाथ को दाएं घुटने पर तथा बाएं हाथ को बाएं घुटने पर रखें।

3.लंबी सांस लें उसके बाद मुंह द्वारा सांस को छोड़ें।

4.अब गर्दन को सामने की ओर झुकाकर ठोड़ी को गले के नीचे लगाएं। अगर आपके गर्दन में दर्द हो तो बिना गर्दन झुकाए भी कर सकते हैं।

5.सांस लेने और छोड़ने की क्रिया को दो से पांच बार करें।

6.दोनों आंखों से इस तरह से देखें कि दोनों आंखों की नजर दोनों भौंहों के बीच में रहें।

7.इसके बाद अपने मुंह को खोलें और जीभ को उसी अवस्था में बाहर की तरफ निकालें।

8.मेरुदंड को बिल्कुल सीधा रखना चाहिए। इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।

स्वस्थ तन और स्वस्थ मन हर किसी की चाह होती है। परन्तु यह यूँही संभव नहीं हो सकता क्यूंकि आज व्यक्ति के पास धन तो है, परन्तु कितना आधिक धन क्यूँ  न हो, आज हम अपना खान पान शुद्ध रखने में विफल है।

मिलावट और तेजी से बढ़ते प्रदुषण ने हमारी उम्र छोटी कर दी है। आज आवस्यकता है, इस बदलते दौर में कुछ ऐसा करने की जिससे हम निरोगी जीवन का आनंद ले सकें।

यह चीज भी संभव है, की हम बिना दवाइयों और ओषधियो के अपने जीवन को सुचारु रूप से चला सके। यह सब संभव है, योग की सहायता से, यह एक ऐसा वैज्ञानिक क्रिया कलाप है।

जिसके तहत हम दैनिक जीवन में आने वाली बीमारियों के, साथ गंभीर बीमारियों से कोसो दूर रह कर एक स्वस्थ जीवन जी सकते है। साथ ही एक स्वस्थ समाज की नींव  रख सकते हैं।

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