योगा पोज़ेज़ फॉर हैप्पी पीरियड्स

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Yoga for Happy periods
Yoga for Happy periods

मासिकधर्म महिलाओं से जुडी हुई एक मासिक क्रिया हैजिसकी सहायता से रक्त के शुद्धकरण के साथ ही शरीर में बदलते हार्मोन्स भी नियंत्रण में रहते है

इस प्रक्रिया में खान पान का बहुत अधिक असर देखा जाता है, परन्तु आज कोई भी चीज शुद्ध नहीं रह गयी है यही कारण है, की मासिक धर्म आज एक बड़ी समस्या के रूप में उभर रहा है

अतः कुछ योग करके हम मासिक धर्म में आने वाली समस्याओ से निजात पा सकते हैसाथ ही यदि कोई समस्या न हो तो भी इन योग का अभ्यास करके भविष्य में आने वाली समस्याओ से बचा जा सकता है 

1) उपविष्ट कोणासन
2) जानुशिरासन
3) पश्‍चिमोत्तानासन
4) बद्धकोणासन

उपविष्ट कोणासन

Upvistha Konasan

उपविष्ठ कोणासन करने कीविधि

1.उपविष्ठ कोणासन को करने के लिए सबसे पहले बैठ जाइए, फिर पैरों को फैला लीजिये और पैरों को इस तरह फैलाये की जैसे वे आपके श्रोणि(Pelvic कोख ) के साथ 90 डिग्री का कोण बनाये।

2.अपने पंजो को सीधा रखे और उंगलियों को अंदर की और मोड़े। इससे आपको अपनी पीठ के निचले हिस्से में एक कर्व महसूस होगा। यदि आप इसे नहीं कर पा रहे है तो प्राॅप का इस्तेमाल कर सकते है| आप फोम के तकिया पर बैठ जाये, इससे आपके पेल्विस में स्थिरता आएगी और नीचे की और झुकने में आसानी होगी।

3.अपने हथेलियों को फर्श पर रखें, और इसे उस तरह रखना है की जिससे यह आपके कूल्हों के पीछे रहे। लम्बी और गहरी श्वास ले। श्वास इस तरह ले की आपका शरीर हल्का लगे और स्पाइन में जगह खाली प्रतीत हो। इस स्थिति में कुछ सेकंड तक रुके जब तक आपके पैरों में खिचाव अच्छा लग रहा हो।

4.अब अपने पीठ के निचले हिस्से को सहारा दे। पेट से हवा को लेते हुए सांसो को छोड़े। फिर धीरे हाथों को सामने की तरफ लाये।

5.जितना ज्यादा लम्बी आप सांस ले सकते है उतना ज्यादा शरीर को स्ट्रेच करे।

6.आपको अपनी रीढ़ की हड्डी को तब तक स्ट्रेच करना है जब तक आप कर सके। जब आप असुविधाजनक महसूस करने लगे तब श्वास को रोके। लंबे और गहरी सांस लें और कोशिश करे की आप एक मिनट के लिए इस मुद्रा में रुक सके।

7.फिर श्वास छोड़ते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाये। अपने घुटनों को मोड़ लें और अपने पैरों को एक साथ कर ले।

सावधानिया

1.यदि आपके पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो तो आप इस आसन को करते समय एक कंबल या एक ब्लॉक पर बैठें।

2.उपविष्ठ कोणासन के फायदे

3.यह आसन पैरों के अंदरूनी भाग और पैरों के पीछे एक अच्छा खिंचाव देता है I

4.उपविष्ठ कोणासन करने से पेट के अंग टोंड होते है।

5.इसे नियमित करने से रीढ़ की हड्डी में मजबूती आती है।

जानुशिरासन

Jaanushirasan

विधिः

1.शान्त चित्त होकर कमर को सीधा रखते हुए सुखपूर्वक बैठ जाएं।

2.दोनों टांगों को सामने की तरफ सीधा लाएं व दोनों पैरों को एक फुट के करीब आपस मेंखोल लें।

3.बाईं टांग को घुटने से मोड़ते हुऐ बाएं तलवे को दाईं जंघा के साथ लगाएं और बाएं घुटने को जमीन से छूने दें। कमर सीधी रखें।

4.श्वास भरते हुएए, दोनों बाजुओं को सीधा में रखते हुए कानों के पास ले जाएं।

5.बाजू सीधी ऊपर व हथेलियाँ सामने की ओर रखते हुए श्वास छोड़ दें।

6.पुनः श्वास भरें और श्वास छोड़ते हुएए कमर से आगे झुकते हुएए मस्तक को दाएं घुटने की तरफ ले जाएं। बाजू सीधी रखें व दोनों हाथों को दाएं पैर की तरफ ले जाकर दाएं पंजे को पकड़ लें।

7.दोबारा श्वास भरें और श्वास छोड़ते हुए कमर को थोड़ा ओर आगे खींचते हुए मस्तक कोघुटने से लगाएं।

8.यथासम्भव बाह्य कुम्भक करते हुए यथाशक्ति रुकें।

9.श्वास भरते हुए धीरे-धीरे कमर को वापिस लाएं ओर बाजू सीधी कानों के पास ले जाएं। श्वास छोड़ते हुए हाथ नीचे लाएं।

10.इसी क्रम को पैर बदलकर करें।

लाभः

1.मधुमेह के अतिरिक्त कब्ज दूर करने में सहायक।

2.फेपड़ों को स्वस्थ बनाता है।

3.जठराग्नि प्रदीप्त कर पाचन शक्ति बढ़ाता है।

4.कमर, जांघ व पिण्डलियों की मांसपेशियों को पुष्ट व सशक्त बनाता है।

5.मूत्र सम्बन्धी शिकायत दूर करने में उपयोगी।

6.आलस्य दूर कर शरीर में स्फूर्ति लाता है।

सावधानियाँः

1.उच्च रक्तचाप से ग्रस्त व्यक्ति इस आसन को न करें।

2.मासिक धर्म के दौरान व गर्भवती महिलाएं इस आसन को न करें।

पश्‍चिमोत्तानासन

Paschimottanasan

तरीका

1.सबसे पहले आप जमीन पर बैठ जाएं।

2.अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं।

3.पीठ की पेशियों को ढीला छोड़ दें।

4.सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं।

5.फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके।

6.आप कोशिश करते हैं अपने हाथ से उँगलियों को पकड़ने का और नाक को घुटने से सटाने का।

7.धीरे सांस लें, फिर धीरे सांस छोड़े

8.और अपने हिसाब से इस अभ्यास को धारण करें।

9.धीरे इस की अवधि को बढ़ाते रहे।

10.यह एक चक्र हुआ।

11.इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

पश्चिमोत्तानासन के लाभ 

1.पश्चिमोत्तानासन योग रीढ़ की हड्डी के लिए: यह आसन मेरुदंड को लचीला बनाता है और हमें बहुत रोगों से दूर करता हैं।

2.पश्चिमोत्तानासन योग मोटापा कम के लिए: अगर आपको अपनी पेट की चर्बी कम करनी हो तो इस आसन का नियमित अभ्यास करें। यह पेट को कम करने के साथ कमर को पतला करने में भी मदद करता है।

3.वीर्य सम्बंधित परेशानियों में: यह आसन वीर्य (Semen) सम्बंधित परेशानियों को दूर करता है।

4.पेट की मांसपेशियों के लिए: इसका नियमित अभ्यास करने से पेट की पेशियां मजबूत होती है जो पाचन से सम्बंधित परेशानियां जैसे कब्ज, अपच को दूर करने में सहायक है।

5.पश्चिमोत्तानासन त्वचा रोगों की लिए: इस आसन के अभ्यास से त्वचा रोगों को दूर करने में सहायता मिलती है।

6.साइटिका योग: यह आसन साइटिका से सम्बंधित रोगों को दूर करता है।

7.तनाव कम करने के आसन: पश्चिमोत्तानासन का नियमित अभ्यास से तनाव में बहुत हद तक कण्ट्रोल पाया जा सकता है और साथ ही साथ क्रोध को दूर करते हुए मन को शांति एवम प्रसन्न रखता है। इस आसन को करने से गुस्सा नियंत्रित होता हैं|

8.पथरी के लिए योग: पश्चिमोत्तानासन के अभ्यास से आप गुर्दे की पथरी को रोक सकते हैं।

9.एजिंग को धीमा करने वाला योग: इसके अभ्यास से आप उम्र की गति को धीमा कर सकते हैं।

10.पश्चिमोत्तानासन बवासीर के लिए: यह बवासीर में लाभकारी है।

11.अनिद्रा रोग में सहायक : यह आसन अनिद्रा रोग में लाभदायक है।

12.बौनापन दूर करें योग से: पश्चिमोत्तानासन के नियमित अभ्यास से शरीर की हाइट बड़ाई जा सकती है और बौनापन से निजात मि सकती है।

13.चेहरे पर तेज लाता है : इस आसन के अभ्यास से पुरे शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर हो जाता है जो चेहरे पर तेज लाता है, कमजोरी को दूर करता है। आपको तरोताजा रखते हुए मन को खुश रखता है।

14.पेट के कीड़े माड़ने के लिए: पेट के कीड़े मारता है।

15.महिलाओ के लिए लाभकारी: यह आसन महिलाओ के कई रोगों में भी लाभकारी है और महिलाओ के मासिक धर्म से सम्बन्धित सभी विकार के हल निकालने में कारगर है।

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