घुटने के दर्द के लिए योगासन

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बहुत से लोग आज घुटने के दर्द से परेशान है और उम्र बढ़ने के साथ ही यह समस्या एक गंभीर रूप ले लेती है, हालांकि एलोपैथिक चिकित्सा में इसका इलाज संभव है ।

परन्तु योगविधा द्वारा भी हम इसका आसानी से इलाज कर सकते है,जो की इस समस्या के लिए एक स्थाई हल होगा।

स्वस्थ तन और स्वस्थ मन हर किसी की चाह होती है। परन्तु यह यूँही संभव नहीं हो सकता क्यूंकि आज व्यक्ति के पास धन तो है, परन्तु कितना आधिक धन क्यूँ  न हो, आज हम अपना खान पान शुद्ध रखने में विफल है।

मिलावट और तेजी से बढ़ते प्रदुषण ने हमारी उम्र छोटी कर दी है।आज आवश्यक्ता है, इस बदलते दौर में कुछ ऐसा करने की जिससे हम निरोगी जीवन का आनंद ले सकें।

यह चीज भी संभव है, की हम बिना दवाइयों और औषधियों के अपने जीवन को सुचारु रूप से चला सके।यह सब संभव है, योग की सहायता से, यह एक ऐसा वैज्ञानिक क्रिया कलाप है।

जिसके तहत हम दैनिक जीवन में आने वाली बीमारियों के, साथ गंभीर बीमारियों से कोसो दूर रह कर एक स्वस्थ जीवन जी सकते है। साथ ही एक स्वस्थ समाज की नींव  रख सकते हैं।

1) नी रोटेशन-उत्तानासन
2) अर्ध तितली आसन-गुल्फ घूर्णन
3) अर्ध कपोत आसन-नी स्ट्रेचिंग

उत्तानासन (हस्तपादासन)

कार्यविधि :

Uttanasan

1.उत्तानासन करने के लिए किसी साफ़ स्थान पर चटाई बिछा के ताड़ासन में या सीधे खड़े हो जाएं।

2.इसके बाद साँस को अन्दर की ओर लेते हुए अपने दोनों हाथों को अपनी कमर पर रखें।

3.अब अपनी साँस को बाहर की ओर छोड़ते हुये कमर के यहाँ से शरीर को मोड़ते हुयें नीचे की ओर झुकें।

4.ध्यान रखें की अपने धड यानि अपने ऊपर के हिस्से को सीधा रखें बस कमर के यहाँ से मुड़ें।

5.अपने दोनों हाथों को कमर हटा के जमीन को छूने का प्रयास करें।

6.अपने सिर को स्वतंत्र अवस्थ में लटकने दें और अपनी गर्दन पर कोई खिचाव ना बनाने दें।

6.अपने सिर को अपने पैरो से जोड़ने का प्रयास करें।

7.अपनी क्षमता के अनुसार इस स्थिति में कुछ सेकंड के लिए रहें।

8.अब अपनी प्रारंभिक आने के लिए अपने साँस को अन्दर लेते हुयें अपनी कमर को सीधा करते जाएं।

तितली आसन

Titli Aasan

कार्यविधि

1.पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएँ,रीढ़ की हड्डी सीधी रहे।

2.घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएँ,पाँव के तलवे एक दुसरे को छूते हुए।

3.दोनों हाथों से अपने दोनों पाँव को कस कर पकड़ लें। सहारे के लिए अपने हाथों को पाँव के नीचे रख सकते हैं।

4.एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें।

5.लेकिन हां यह करते वक्त ध्यान रहे कि हाथ सीधे रहें और शरीर भी पूरी तरह सीधा होना चाहिए|

6.ऐसा इसलिए करना चाहिए ताकि रीढ़ की हड्डी सीधी हो जाए|

7.लंबी,गहरी साँस ले, साँस छोड़ते हुए घुटनो व् जांघो को फर्श की ओर दबाएँ।

8.तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें। और धीरे गति बढ़ाएँ ।

9.जितना संभव हो उतनी तेज़ी से प्रक्रिया को करें| धीमा करते हुए रुकें,गहरी साँस ले,साँस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें

10.कोहनी से जांघों या घुटनो पर दबाव डाले जिससे घुटने व् जांघ जमीन को छुए।

11.जाँघो के अंदरुनी हिस्से में खिंचाव महसूस करें और लंबी गहरी साँस लेते रहें। मांसपेशियों को विश्राम दें

12.एक लंबी गहरी साँस ले और धड़ को ऊपर लाएँ|

13.साँस छोड़ते हुए धीरे से मुद्रा से बाहर आएं|

14.5इसके पश्चात अपने पैरों को धीरे-धीरे सीधा कर लें और कुछ समय तक शरीर को ढीला छोड़ दें|

कपोत्तासन

Kapottasan

कार्यविधि :

1.कपोत्तासन में सबसे पहले अपने घुटनों के नीचे कूल्हों  को खोलते हुए बैठ जाइए। इस मुद्रा में हाथ, सिर और कूल्हे एक ही लाइन में होने चाहिए। इसके बाद अपने दोनों हाथों से कोख (पेट का एक हिस्सा ) के पीछे दबाइए

2.अब सांस लेते हुए ठोढी को अंदर की तरफ दबाइए। सिर को जितना पीछे तक कर सकते हैं कीजिए इसके आपका सीना आगे की तरफ आ जाएगा। उसके बाद सिर को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आने दीजिए।

3.अब सामान्य स्थिति में आने से पहले अपने हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में कीजिए। उसके बाद अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर से पीछे की तरफ ले जाइए। अपने कूल्हों को आगे की तरफ कीजिए, ध्यान रहे कि इस मुद्रा में आपके सिर का मूवमेंट आसानी से हो जाए।

3.अब अपने दोंनों जांघों को सही कोण में रखिए जिससे कि आप आसानी से पीछे की तरफ जा सकें। उंगलियों को अपने पैर के पास ले जाते हुए हथेली को फर्श पर रख दीजिए। अब अपने सिर को आराम से फर्श पर रखिए।

4.अब अपने हाथों से फर्श पर दबाव डालते हुए श्रोणि को ऊपर की तरफ जितना उठा सकते हैं उठाइए। अब रीढ की हड्डी के ऊपरी भाग पर दबाव डालते हुए हाथों से पैर की तरफ मूवमेंट कीजिए‍। अब अपने गर्दन पर दबाव डालते हुए माथे को फर्श पर रख दीजिए।

5.आराम से अंदर-बाहर सांस लीजिए और छोडि़ये । अब अपने शरीर से हाथों और जंघों पर दबाव डालिए।

6.इस मुद्रा में 30 से 60 सेकेंड तक रहिए। अब आराम से सांस लीजिए और सांस लेने के साथ सीने को फुलाइए। इसके बाद सामान्य स्थिति में आ जाइए।

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