योगा पोज़ेज़ फॉर साइटिका

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Yoga for Sciatica
Yoga for Sciatica

गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के तहत, हमारे शरीर की नर्व्स ब्लॉक होने लगती है। साइटिका भी इनमे से ही एक है।

रीढ़ की हड्डी के निचले भाग से लगी हुई, एक तंत्रिका जिसमे सही ढंग से रक्त संचार न होने से, एक तीव्र क्षणिक और गंभीर दर्द उठता है।

इस बीमारी को योग द्वारा आसानी से नियंत्रित और सदैव के लिए दूर किया जा सकता है।

1) उत्थित एकपादासन
2) सेतुबंधासन
3) पवनमुक्तासन-हिप स्ट्रेच
4) अर्ध शलभासन-शलभासन

उत्थित एकपादासन

EKpadasan

विधि:

सर्वप्रथम पीठ के बल आराम के साथ चेतन आसन की तरह भूमि पर लेट जाते हैं। फिर दायें पैर को धीरे-धीरे ऊपर उठाते हैं तथा पैर बिना मोड़े हुए सीधा रखते हैं।

लगभग 70 (अंश) से 90 (अंश) तक लाकर 10 सेकेण्ड रुकते हैं फिर धीरे-धीरे पैर को जमीन पर आराम से वापस रखते हैं। ठीक इसी प्रकार बायें पैर को धीरे-धीरे ऊपर की ओर आराम से उठाते हैं।

पैर को सीधा रखते हुए 10 सेकण्ड तक रुकते हैं। इस समय 70-90(अंश) तक की स्थिति में रहते हैं फिर धीरे से पैर को जमीन पर आराम के साथ वापस लाते हैं ऐसा एक-एक पैर से 3-3 बार करते हैं।

लाभ-सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इस आसन को करने से कब्ज दूर होता है। उदर संबंधी मांसपेशियों को मजबूत करता है एवं सक्रिय बनाये रखता है। शरीर में पाचन शक्ति को बढ़ाता है, आंतों को सक्रिय बनाता है।


किसे करना है- पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति ही इस आसन को करें। 

किसे नहीं करना हैअस्वस्थ व्यक्ति जैसे ज्वर, हृदय रोगी, पीठ दर्द से ग्रसित त्रिकसूल (सायटिका) से पीड़ित व्यक्ति एवं गर्भवती महिलायें इस आसन को न करें।

सेतुबंधासन

Setubandhasan

सेतुबंधासन करने कि प्रक्रिया

शुरुआत में अपने पीठ के बल लेट जाएँ।

अपने घुटनो को मोड़ लें। घुटनो और पैरों को एक सीध में रखते हुए, दोनों पैरों को एक दुसरे से १०-१२ इंच दूर रखते हुए फैला ले।

हाथों को शरीर के साथ रख ले। हथेलियाँ ज़मीन पर रहे।

साँस लेते हुए, धीरे से अपनी पीठ के निचले, मध्य और फिर सबसे ऊपरी हिस्से को ज़मीन से उठाएँ। धीरे से अपने कन्धों को अंदर की ओर लें। बिना ठोड़ी को हिलाये अपनी छाती को अपनी ठोड़ी के साथ लगाएँ और अपने कन्धों, हाथों व पैरों को अपने वज़न का सहारा दें। शरीर के निचले हिस्से को इस दौरान स्थिर रखें। दोनों जंघा इस दौरान एक साथ रहेंगी।

चाहें तो इस दौरान आप अपने हाथों को ज़मीन पर दबाते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को उठा सकते हैं। अपनी कमर को अपने हाथों द्वारा सहारा भी दे सकते हैं।

आसन को 1-2 मिनट बनाएँ रखें और साँस छोड़ते हुए आसन से बहार आ जाएँ।

सेतुबंधासन के लाभ

पीठ की मासपेशियों को मज़बूत बनाता हैं।

पीठ की मासपेशियों को आराम देता हैं।

पीठ, छाती व गर्दन में अच्छा खिंचाव पैदा करता है।

मन को चिंतामुक्त करता है और तनाव काम करके आराम देता है।

फेफड़ों को खोलता है और थाइरोइड से सम्बंधित समस्या को दूर करता है।

पाचन क्रिया को ठीक करने में सहायता करता है।

मासिक धर्म व रजोनिवृति के दौरान मदद करता है।

उच्च रक्त चाप, अस्थमा, ऑस्टियोपोरोसिस व साइनस के लिए लाभदायक।

पवनमुक्तासन-हिप स्ट्रेच

Hip Strech

पवनमुक्तासन करने कि प्रक्रिया

अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और पैरों को साथ में कर ले और हाथों को शरीर के साथ जोड़ लें।

गहरी लंबी साँस अंदर लें और साँस छोड़ते हुए अपने दाएँ घुटने को अपनी छाती के पास ले कर आएँ। जंघा को हाथों से पकड़ते हुए पेट पर दबाएँ।

दोबारा से एक लंबी गहरी साँस ले और छोड़ते हुए अपने सर और छाती को ज़मीन से उठाएँ। अपनी ठोड़ी को अपने दाएँ घुटने से लगाएँ।

आसन में रहें और लंबी गहरी साँसे लेते रहें।

ध्यान दे: साँस छोड़ते हुए अपने घुटने को हाथों से कस कर पकड़ लें। छाती पर दबाव बनाएँ। साँस लेते हुए, ढीला छोड़ दे।

साँस छोड़ते हुए, वापस ज़मीन पर आ जाएँ और विश्राम करें।

यह पूरी प्रक्रिया बाएँ पैर के साथ करें और फिर दोनों पैरों के साथ करें।

चाहे तो आगे-पीछे थोड़ा झूल सकते है। दाएँ-बाएँ भी ३-५ बार झूल सकते हैं और उसके बाद विश्राम करें।

पवनमुक्तासन के लाभ | Benefits of the Pawanmuktasana

पीठ व पेट कि मासपेशियों को मज़बूत बनाता है।

हाथों व पैरों की मासपेशियों को मज़बूत बनाता है।

पेट एवं दूसरे इन्द्रियों की मालिश करता है।

अर्ध शलभासन-शलभासन

half Lotus Pose

विधि 

सर्वप्रथम पेट के बल लेट जाएँगे । पैरो को पास रखेंगे और हाथों की मुत्ठियाँ बनाकर जाँघ के नीचे रखेंगे। अब दायें पैर को साँस लेते हुए उपर उठाइए ।धीरे से वापिस लाइए ।इसी तरह बायें पैर से कीजिए।
5-5 बार इसी  तरह दोहरायें ।

ध्यान रखिएगा पैर को उपर ले जाते समय घुटने से सीधा रखेंगे।

साबधानियाँ हर्निया ,आँतों की गंभीर समस्या व हृदय रोगी इस अभ्यास को न करें।

लाभ

मेरुदण्ड की निचली मासपेशयों को  मजबूत कर रक्त संचार तेज करता है। शियॅटिका में बहुत लाभकारी है ।हृदय को मजबूत बनाता है।पेट के रोगों में भी लाभप्रद है।

स्वस्थ तन और स्वस्थ मन हर किसी की चाह होती है। परन्तु यह यूँही संभव नहीं हो सकता क्यूंकि आज व्यक्ति के पास धन तो है, परन्तु कितना आधिक धन क्यूँ  न हो, आज हम अपना खान पान शुद्ध रखने में विफल है।

मिलावट और तेजी से बढ़ते प्रदुषण ने हमारी उम्र छोटी कर दी है। आज आवस्यकता है, इस बदलते दौर में कुछ ऐसा करने की जिससे हम निरोगी जीवन का आनंद ले सकें।

यह चीज भी संभव है, की हम बिना दवाइयों और ओषधियो के अपने जीवन को सुचारु रूप से चला सके। यह सब संभव है, योग की सहायता से, यह एक ऐसा वैज्ञानिक क्रिया कलाप है।

जिसके तहत हम दैनिक जीवन में आने वाली बीमारियों के, साथ गंभीर बीमारियों से कोसो दूर रह कर एक स्वस्थ जीवन जी सकते है। साथ ही एक स्वस्थ समाज की नींव  रख सकते हैं।

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